क्यूँ ऐसा लगा जैसे दूरिया है अब दोस्त की दोस्ती में
कभी जहाँ ना कम थी यारियाँ एक दूसरे के मन में
जाने यह सच है या वेहेम पर लगा
की कम है एक प्यारा फूल
इस प्यारी दोस्ती की क्यारी में
बस अब वो अपनापन कम सा लगता है
मेरी दोस्त कुछ बदली सी लगती है
वेहेम रहे यह मेरे मॅन का
चलती रहे यारी यूही इसी तरह.
Written By : रश्मि
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